Tuesday, March 10, 2009

हिटलर की काली दुनिया

होली के पहले दिन जर्मन नरसंहार के बारे में पढ़ लिया। आश्वित्ज के कैंप में दुबले पतले लाखों लोगों को केवल मौत के घाट इसलिए उतार दिया गया क्योंकि वह दुर्भाग्य से यहूदी थे और उन लोगों ने व्यवसाय में सफलताएं अर्जित कर ली थी। कुछ लोग कहते हैं कि यहूदियों का चरित्र शाईलाक सा होता है मर्चेन्ट आफ वेनिस के व्यापारी सा, जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में खडूस कहते हैं। लेकिन फिर दूसरे पूंजीपतियों में क्या दोष होता है। कुछ सालों पहले मेरा एक छोटा भाई आया था मेरे घर। वह 10 वीं की परीक्षा में बैठा था और इतिहास में रूचि रखता था। उसने कहा कि वह मीन कैंफ खोज रहा है। मैंने पूछा क्यों, तुम गांधी को क्यों नहीं पढ़ते। उसने कहा कि गांधी ने भारत को आजादी दिलाई, इसमें भी मुझे शक है जबकि हिटलर ने तो अकेले दम पर ही दुनिया भर को हिला कर रख दिया। क्या हम अब भी अपनी इतिहास की किताबों में सिकंदर और चंगेज जैसे नायकों को शूरवीर बताकर महिमामंडित करते रहेंगे अथवा फिर से एक नई किताब लिखेंगे जहां पर हमारे धर्मग्रंथों की तरह हिटलर जैसे लोग राक्षसों की श्रेणी में रखे जायेंगे और इनसे कौम को बचाने वाले लोग भगवान का दर्जा पायेंगे।

1 comment:

vinay singh said...

jab first world war hua tha tab jarmani ko aarthik madad ki jarurat padi tab jarmani mein business kar rahe yahudio se jarmani walo ne help karane ko kaha tab yahudiyo ne kaha ye tumhari problem hai tum nipto,kya ye jayaz hai hum jis des ki roti khaye us desh se gaddari kare,yehi baat hital k dil ko lag gayi jab wo power mein aaya to in yahudiyo se deshdroh ka badala le liya,kya ye tanasahi huyi ya des k hit me liya hua ek sahi faisala.sikander agar mahan tha to laden kyu aatankwadi hai dono ka maksad to dunia par raaj karna tha.